हर वर्ष बिगड़ रहे दर्जनों नसबंदी केस, मुआवजा सिर्फ 30 हजार
झालावाड़. न पुरुषों की नसबंदी बढ़ी न ही महिलाओं के फेल केसों की संख्या कम हो पाई है। सरकारी स्तर पर नसबंदी कराने वाली दर्जनों महिलाएं इसके फेल होने पर मुआवजे का दावा कर रही हैं लेकिन मुआवजा भी मिलता है तो महज 30 हजार रुपए। उसके लिए भी लंबा इंतजार। सरकार की निगरानी का आलम यह है कि 8 से 10 फीसदी महिलाएं नसबंदी के बाद गर्भवती हो जाने की शिकायत तक नहीं कर पाती। कई केस मुआवजे के लिए अयोग्य बता दिए जाते हैं तो कई केसों में मुआवजा मिलने में लंबा समय लग जाता है। जानकारी के अनुसार झालावाड़ जिले में हर साल 50 से 60 नसबंदी केस बिगड़ रहे हैं। ये तो सरकारी अस्पतालों का आंकड़ा है। निजी अस्पतालों के ऐसे मामलों की न तो गणना हो पा रही है न ही सरकारी स्तर पर इसके लिए कोई सिस्टम बना है। यानी निजी अस्पताल में महिला नसबंदी के असफल मामलों की संख्या का कोई रेकॉर्ड नहीं है। ऐसे में नसबंदी से मिलने वाली सहायता के चलते ग्रामीण महिलाएं अधिकतर सरकारी अस्पताल ही चुनती है। शहरी व संपन्न परिवार की महिलाएं निजी चिकित्सालयों को तरजीह दे रही हैं।
पिछले साल 37 तो इस साल 49 ऑपरेशन फेल
जिले में पिछले साल नसबंदी के 37 तो इस साल अब तक 49 ऑपरेशन फेल बताए जा रहे हैं। यह तो वो है जो मुआवजे के लिए भेजे गए। रिजेक्ट या फिर शिकायत दर्ज नहीं कराने वाले मामलों की संख्या अलग है। मुआवजा अब सरकार की तरफ से दिया जा रहा है जो पहले इंश्योरेंस कंपनी देती थी। नसबंदी के केस फेल होने वाले मामले चार से पांच फीसदी है लेकिन सभी समिति के पास नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे पहुंचने वाले एक फीसदी से भी कम है।
आधे केसों का ही होता है भुगतान
सूत्रों का कहना है कि जिले में अब तक 49 नसबंदी के बाद गर्भ ठहरने के मामले आए हैं लेकिन आधों का ही भुगतान हो पाया है। नसबंदी के केस फेल होना कमेटी तय करती है। इस कमेटी में स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिक व एक सर्जन होता है। कई केसों में नसबंदी के दौरान ही सर्जन अपने कमेंट में दोबारा गर्भ ठहरने की आशंका जता देता है। ऐसे केसों में मुआवजा डिफ्यूज हो जाता है। बाकी केस जयपुर रेफर कर दिए जाते हैं।
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में निर्णय लिया गया था कि पुरुष नसबंदी पर 5 हजार रुपए का स्मार्ट फोन दिया जाएगा। सरकार की ओर से नसबंदी फेल होने पर 30 हजार रुपए दिए जाने का प्रावधान है। नसबंदी फेल होने के बाद समिति के समक्ष शिकायत रखी जाती है उसके बाद जयपुर भेजी जाती है। फिर भुगतान होता है।
डॉ. मुकेश बंसल, डिप्टी सीएमएचओ, परिवार कल्याण
source https://www.patrika.com/jhalawar-news/failed-vasectomy-cases-in-jhalawar-6601023/
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