जिले में कृषि संकाय का अमला खाली, कैसे बनेंगे कृषि वैज्ञानिक

एक्सक्लूसिव

हरिसिंह गुर्जर

झालावाड.राज्य सरकार द्वारा कृषि विज्ञान में नए-नए प्रयोग कर उन्नत कृषि को बढ़ावा देने की बात तो खूब की जा रही है। लेकिन सूबे की सरकार में झालावाड़ जिले में करीब 800 कृषि संकाय के छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। झालावाड़ में सरकार ने 17 स्कूलों में कृषि संकाय तो खोल दिया है। लेकिन एक में भी कृषि संकाय के व्याख्याता नहीं है। करीब डेढ़ दर्जन के ओर प्रस्ताव मांगे गए है। ऐसे में पुराने स्कूलों का अमला खाली है, नए फिर से खोलने का क्या फायदा होगा। स्कूलों में छात्रों को पढ़ाने वाला कोई नहीं होने से विद्यार्थी भगवान भरोसे स्वयं की पढ़ाई करने को मजबूर है। उन्हें प्रायोगिक जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में कृषि विज्ञान संकाय होने का छात्रों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। गरीब किसानों अभिभावकों के बेटों को निजी शिक्षण संस्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है।

दस पद स्वीकृत दस ही खाली-
कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं तो ला रही है। लेकिन जिले में 17 कृषि संकाय के स्कूलों में एक भी पढ़ाने वाला व्याख्याता नहीं लगाया गया है।। ऐसे में कृषि संकाय के 805 छात्रों का भविष्य दावं पर लगा हुआ है। लम्बे समय से व्याख्याताओं की भर्ती नहीं होने से जिले को एक भी व्याख्याता नहीं मिल पाया है। यहां 10पद स्वीकृत है, सभी खाली है।जिले में करीब 60व्याख्याताओं सहित 9 फिल्ड प्रभारियों की आवश्यकता है।

नहीं होते हैं प्रेक्टिकल -
जिले में कृषि संकाय में एक भी व्याख्याता नहीं होने से छात्रों के कृषि संबंधी प्रेक्टिल एक भी नहीं हो पाते हैं। वहीं छात्रों को विज्ञान संकाय के दूसरे शिक्षकों के भरोसे रहना पड़ रहा है। उनकी भी कमी होने से वह अपने विषय की ही पढ़ाई करवा पाते हैं। ऐसे में12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों ने बताया कि कोर्स पूरा नहीं होने से बोर्ड परीक्षा को लेकर पेरशान है, कैसे तैयारी करेंगे।

बरसो पुराने दोनों स्कूल भी खाली-
जिले में करीब 22 वर्षो से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय झालरापाटन व खानपुर में कृषि संकाय विषय चल रहा है, लेकिन वर्तमान में यहां भी एक भी व्याख्याता नहीं है। ऐसे में छात्रों ने बताया कि पढ़ाने वाला कोई नहीं होने से थ्योरी व प्रेक्टिल की कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। बिना फिल्ड ज्ञान के थ्योरी से कुछ समझ में नहीं आता है। खेतों में सीखा हुआ ज्ञान ही आगे काम आता है।

ये काम हो रहे प्रभावित-
बिना गुरूजी के छात्रों को कृषि उत्पादकता को बढ़ाने फसलों की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार, कीट तथा खरपतवारों पर सुरक्षित और प्रभावी तरीके से नियंत्रण और मृदा तथा जल संरक्षण में सुधार के उपायों के सुझाव जैसे काम के बारे में छात्र अनभिज्ञ है। इसके साथ ही कृषि कार्यों जैसे बीज उपचार व बीज की बुवाई कब की जाती है आदि की प्रायोगिक जानकारी नहीं मिल पा रही है। तो कृषि महाविद्यालयों की विजीट भी नहीं करवाई जा रही है।

फैक्ट फाइल
स्कूलका नाम नामांकन स्वीकृत पद रिक्त पद
राउमावि झा.पाटन 327 2 रिक्त
राआउमावि म.थाना 29 1 रिक्त
राआउमावि पिड़ावा 31 1 रिक्त
राआउमावि डग 2 1 रिक्त
राआउमावि चौमहला 72 1 रिक्त
राआउमावि खानपुर 59 1 रिक्त
राआउमावि बकानी 18 1 रिक्त
राउमावि भ.मंडी 142 1 रिक्त
राआउमावि अकलेरा 15 1 रिक्त
राउमावि गंगधार 0 0 0
राउमावि कचनारा 13 0 0
राउमावि पगारिया 5 0 0
राउमावि खारपाकला 36 0 0
राउमावि माथनिया 13 0 0
राउमावि उन्हेल 16 0 0
राउमावि आमेठा 23 0 0
राउमावि रटलाई 4 0 0


राज्य सरकार को भेज रखी-
जिले में कृषि संकाय के 17 स्कूलों में रिक्त पदों की सूचना राज्य सरकार को भेज रखी है। प्रेक्टिल के लिए विज्ञान संकाय के व्याख्याता लगाते हैं।
पुरूषोत्तम माहेश्वरी,जिलाशिक्षा अधिकारी, माध्यमिक, झालावाड़।



source https://www.patrika.com/jhalawar-news/the-staff-of-the-faculty-of-agriculture-in-the-district-is-vacant-how-7184367/

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