राजस्थान के एक जिले में बाल विवाह रोकने के लिए डीएम ने ऐसा आदेश जारी किया कि मच गया हड़कम्प

झालावाड़ . जिले के विभिन्न अंचलों में अक्षय तृतीया एवं पीपल पूर्णिमा पर बड़ी संख्या मे बाल विवाहों के आयोजन की संभावना अत्यधिक रहती है जो कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। अधिनियम के अनुसार विवाह योग्य लड़के की आयु 21 वर्ष एवं लड़की की आयु 18 वर्ष न्यूनतम होना अनिवार्य है।
जिला मजिस्ट्रेट भारती दीक्षित के आदेशानुसार 3 मई को अक्षय तृतीया एवं उसके पश्चात् 16 मई को पीपल पूर्णिमा एवं अन्य अवसरों पर होने वाले संभावित बाल विवाहों के रोकथाम तथा बाल विवाहों में उत्पन्न बालक बालिकाओं के स्वास्थ्य को होने वाले दुष्परिणामों की आशंका को रखते हुए सम्पूर्ण जिले में विवाह कार्यक्रम से संबंधित प्रिन्टिग प्रेस, लाईट डेकोरेशन एवं टेन्ट कार्य आदि पर पाबंदी लगाना आवश्यक है।
प्रमाण पत्र लेना जरूरी
उन्होंने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 में प्रदत्त शक्तियों के अनुसरण में जिले में होने वाले बाल विवाह को ध्यान में रखते हुए विवाह निमंत्रण पत्र पर मुद्रण करने वाले सभी ङ्क्षप्रङ्क्षटग प्रेस मुद्रकों को निमंत्रण पत्रों के संबंध में वर.वधु की उम्र संबंधी प्रमाण पत्र प्राप्त करने के निर्देश प्रदान किए गए हैं। इसके अतिरिक्त निमंत्रण पत्र में बाल विवाह करना अपराध है एवं विवाह के लिए लड़की की आयु न्यूनतम 18 वर्ष तथा लड़के की आयु न्यूनतम 21 वर्ष होना अनिवार्य है का उपयुक्त स्थान पर अंकन किया जाए।
सूचना चस्पा करनी होगी
टेन्ट व्यवसायी, हलवाई, लाईट डेकोरेशन व्यवसायी, विवाह स्थल के मालिक इस आशय की सूचना अपने कार्यस्थल पर प्रदर्शित करेंगे कि बाल विवाह अपराध है एवं विवाह के लिए लड़की की आयु न्यूनतम 18 वर्ष तथा लड़के की आयु न्यूनतम 21 वर्ष होना अनिवार्य है।



source https://www.patrika.com/jhalawar-news/dm-issued-such-order-to-stop-child-marriage-7498311/

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