कार्यवाहक के भरोसे जिले की कमान, कैसे आएं रैकिंग में प्रथम

झालावाड़. शिक्षा विभाग की रैंकिंग में झालावाड़ जिला े पिछड़ा साबित हो रहा है। अगस्त, सितम्बर में खराब प्रदर्शन के बाद अक्टूबर में भी झालावाड़ ने कोई खास सुधार नहीं किया। इस बार भी जिला 22वीं रैंक हांसिल कर संभाग के अन्य जिलों से भी पिछड़ता जा रहा है। गौरतलब है कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से हर माह रैंकिंग जारी की जाती है। अक्टूबर माह की सूची में जयपुर जिले ने 200.47 अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया है। वहीं, बूंदी दूसरे व गंगानगर तीसरे स्थान पर है।जबकि शिक्षा मंत्री का जिला सबसे अंतिम स्थान पर रहा।

संभाग में बंूदी का बेहतर प्रदर्शन
सरकारी स्कूलों में सभी सूचनाएं एकत्र करवाने के लिए शाला दर्पण पोर्टल पर विद्यालयों की श्रेणी, बेसिक प्रोफाइल, कार्मिकों की संख्या, नामांकन की स्थिति, विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों की सुविधाएं सेवा रिकॉर्ड, विभिन्न प्रपत्र, वैकल्पिक विषय, संकाय, अक्षय पेटिका की स्थिति, कार्य संग्रहण, साइकिल वितरण व छात्रवृत्ति योजना समेत कई बिंदुओं के आधार पर जिलों की रैंकिंग का निर्धारण किया जाता है। प्रत्येक माह शाला दर्पण पोर्टल पर उक्त जानकारी अपलोड करनी होती है। अगर अक्टूबर महीने की बात की जाए तो बंूदी जिले ने 200.31 अंक हासिल कर संभाग में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। कोटा ने 179.27 अंक प्राप्त कर सूची में 23 वां स्थान प्राप्त किया है। वहीं बारां ने 176.61 अंक हासिल कर 27 वां स्थान प्राप्त किया।

ये है संभाग की स्थिति
बंूदी - दूसरी रैंक
झालावाड़ -23वीं रैंक
कोटा -23 वीं रैंक
बारां- 27वीं रैंक

ये रही कमियां
- पोर्टल पर विभिन्न सूचनाओं के मॉडलों को सही तरीके से अपडेट नहीं करना।

-पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी स्तर पर मासिक प्रगति रिपोर्ट के अपडेशन का अभाव।

-जनआधार व आधार लिंकेज व एसडीएमसी रजिस्ट्रेशन का पूर्ण नहीं होना।

- जिला व ब्लॉक शिक्षा कार्यालयों में पदस्थापित अधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षण व पीइइओ स्तर पर सूचनाओं का सही अपडेशन नहीं होना।
- आधार व जनआधार का लिंकेज नहीं होने से छात्रवृति व पोशाक आदि का पैसा विद्यार्थियों के खातों में नहीं आ पा रहा है।

भामाशाहों का कम मिल रहा सहयोग-
प्रदेश में सीकर, चुरु, झुंझुनू सहित अन्य जिलों में स्कूलों को भामाशाहों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। जबकि झालावाड़ जिले में कम मिल रहा है। इसके चलते ज्ञान संकल्प पोर्टल भरी जाने वाली सूचना पूरी नहीं हो पा रही है।

अब ये बिन्दू भी शामिल होंगे रैकिंग में-
नवम्बर माह की रैकिंग में गतिविधियों का भी समावेश किया जाएगा। अब कक्षा 1से 5वीं तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के आधार पर कक्षा5,8वीं,10 वीं, 12वीं बोर्ड कक्षाओं का परिणाम भी देखा जाएगा। वहीं खेलो इंडिया व शिक्षा में बढ़ते कदम के तहत बच्चा हिन्दी,अंग्रेजी पढ़ लेता है या नहीं, लिख लेता है या नहीं ये भी देखा जाएगा। अधिकारियों को 12 निरीक्षण करने होते है उसमें से कितने अधिकारियों ने कितने निरीक्षण किए इसका भी एक कॉलम होगा, जिसमें नए फार्मेट के तहत ये सूचनाएं भरी जाएगी।

कार्यवाहकों के भरोसा जिला-
जिले में शिक्षा विभाग में अधिकारियों का टोटा है। प्रमुख जिम्मेदार पद भी कार्यवाहकों के भरोसे चल रहे हैं। एक अधिकारी के पास तीन-तीन पदों का कार्यभार चल रहा है। जिले में दो माह से जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक व प्रारंभिक का पद कार्यवाहकों के भरोसे चल रहा है। वहीं बकानी, खानपुर को छोड़कर मनोहरथाना, अकलेरा, झालरापाटन, सुनेल, भवानीमंडी, डग आदि में सीबीईओ के पद खाली चल रहे हैं। वहीं दो अधिकारियों के पास तीन-तीन कार्यभार भी है, जिसमें बकानी सीबीईओ मोहनलाल मीणा के पास डीईओ प्रारम्भिक व माध्यमिक का कार्यभार है।खानपुर सीबीईओ मोहनलाल राठौर के पास एडीपीसी समसा व डाइट प्रिन्सीपल का अतिरिक्त कार्यभार भी है। वहीं उप जिला शिक्षा अधिकारी शारीरिक शिक्षा का पद भी 30 जून से खाली चल रहा है।

हजारों पद खाली-
जिले में शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में शिक्षकों व व्याख्याताओं, पीईईओ के पद खाली चल रहे हैं। इससे भी शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। जिले में पीईईओ के 182, व्याख्याता 673, द्वितीय श्रेणी शिक्षक 582, तृतीय श्रेणी शिक्षक लेवल प्रथम व लेवल द्वितीय के करीब 363 तथा शारीरिक शिक्षकों के 100 से अधिक पद खाली चल रहे हैं। ऐसे में जब पढ़ाने व खेल खिलाने वाले ही नहीं होंगे तो विद्यार्थियों की गुणात्मक शिक्षा तो प्रभावित होना तय है। ऐसे में शिक्षा में अच्छी रैंकिंग आना संभव नहीं है।



source https://www.patrika.com/jhalawar-news/the-command-of-the-district-depends-on-the-caretakers-how-to-come-f-7891352/

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