2292 फसल कटाई प्रयोग करने थे, 1600 ही हो पाए, कैसे मिलेगा बीमा क्लेम
झालावाड़.जिले में प्रकृति किसानों पर जमकर कहर बरपा रही है। पहले समय पर बारिश नहीं होने से किसानों की फसलें बेकार हो गई है। फसलों का उत्पादन भी सही नहीं निकल पाया है। वहीं कृषि विभाग द्वारा समय पर फसल कटाई प्रयोग नहीं होने से प्रधानमंत्री फसल बीमा भी किसानों को राहत नहीं पहुंचा पा रही है। समय से खराब फसलों का सर्वे नहीं होने व जिम्मेदार बीमा कंपनी, कृषि व राजस्व विभाग द्वारा अभी तक खराबे का पूरा आंकलन नहीं करने से किसानों को हर बार नुकसान ही उठाना पड़ता है। सूत्रों का कहना है जिले में फसले कट कर मंडियों में पहुंच चुकी है।लेकिन कृषि व राजस्व विभाग को जिले में 2292 फसल कटाई प्रयोग करने थे, लेकिन वो भी अभी तक पूरे नहीं हो पाए है। जिले में अभी तक 1600 ही फसल कटाई प्रयोग हो पाए है। ऐसे में बीमा कंपनी किसानों को कैसे राहत दे पाएगी। ऐसे हालात में किसानों को सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर सोयाबीन आदि की फसले खरीद कर राहत देना चाहिए। लेकिन इस बार सरकारों द्वारा ऐसा नहीं किया गया।
बारिश से क्वालिटी हुई थी प्रभावित-
विशेषज्ञों ने बताया कि जिले में समय पर बारिश नहीं होने व बाद में बेमौसम बारिश से कई जगह फसले खराब हुई थी।उड़द व सोयाबीन की क्वालिटी खराब हुई। किसानों को 72 घंटे के अंदर इसकी सूचना विभाग को देना व ऑनलाइन एप के माध्यम से बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर देनी होती है। जिले में खरीफ फसल: फैक्ट फाइल - जिले में बीमा के लिए कुल आवेदन- 786573 - जिले में किसानों ने बीमा प्रीमियम दिया-14 करोड़ - जिले में केन्द्र व राज्य सरकार का शेयर-46.44-46.44 करोड़ - जिले में बीमित क्षेत्रफल- 1 लाख 69 हजार 916 हैक्टेयर -जिले में फसल कटाई प्रयोग होने -2292 इतने हुए फसल कटाई प्रयोग फसल प्रयोग सोयाबीन- 1032 उड़द- 292 मक्का- 302 धान- 1 कुल 162र्6
किसानों ने ऐसे बताई अपनी पीड़ा
1. पहले फूल निकलने के समय बारिश नहीं होने से फसले खराब हो गई थी। बाद में फलियां बनने के समय बारिश नहीं हुई। इसबार किसानों को काफी नुकसान हुआ है। सर्वे करवाकर प्रधानमंत्री फसल बीमा में किसानों को राहत देनी चाहिए।
राधेश्याम गुर्जर, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान संघ,झालावाड़।
बची फसलें खराब हो गई थी-
2.लौटते मानसून ने किसानों की बची फसलें खराब कर दी। सरकार को सर्वे के काम में गति लाना चाहिए। सरकार आपदा राहत कोष से प्रति बीमा के हिसाब से किसानों को मुआवजा दें। इस बार आपदा कोष में खराबे का आंकलन किया जा रहा है। जिसमें फसल कटाई प्रयोग के आधार पर ही फसल बीमा दिया जाएगा। लेकिन अभी तक किसानों की फसलों का फसल कटाई प्रयोग ही पूरे नहीं हुए,किसानों की जिंस मंडियों में पहुंच रही है। समय पर प्रयोग करें ताकि किसानों को नुकसान की भरपाई हो सके। महेश मेहर,खेजरपुर किसान।
60 फीसदी से अधिक नुकसान-
3.प्रशासन ने अभी तक नहीं बताया कि किसानों की फसले कितनी खराब हुई है, जिले में 60 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है। किसानों को आपदा राहत से मुआवजा देना चाहिए। गंगाराम भील किसान, बक्सपुरा
72घंटे में पंजीयन-
जिन लोगों ने 72 घंटे में पंजीयन करवाया उनका सर्वे हो चुका है। जिले में 1626 प्रयोग हो चुके हैं। उनका डाटा निर्धारण किया जा रहा है। धान के प्रयोग होना है। किसानों को डेटा संधारण के आधार पर जल्द बीमा क्लेम मिलेगा। कैलाशचन्द मीणा, सहायक, निदेशक, कृषि विस्तार, झालावाड़।
source https://www.patrika.com/jhalawar-news/2292-crop-harvesting-experiments-were-to-be-done-only-1600-could-be-d-8544995/
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