मौसम का मिजाज: बादल कोहरा के बाद शीतलहर का दौर,फसलों में पारा पडऩे की संभावना
-कृषि विभाग ने जारी फसलों को बचाने के लिए एडवाईजरी
शहर में इन दिनों मौसम का मिजाज बदला हुआ है। पिछले पांच दिनों बाद बादल, कोहरा, धुंध के छंटने के बाद सर्दी तेवर दिखा रही है। सर्द हवाओं के कारण रात और दिन के पारे में एक-एक डिग्री की गिरावट आई है। शहर में शुक्रवार को दिनभर मौसम साफ रहा। ऐसे में दिनभर शीतलहर चली। शुक्रवार को न्यूनतम 10 डिग्री दर्ज किया गया। व अधिकतम तापमान 25 डिग्री रहा। वहीं जिले में तेज सर्दी को देखते हुए कृषि विभाग ने भी एडवाईजरी जारी की है। खेती में न्यूनतम तापमान का बहुत महत्व है। रबी की फसलों में इससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है। कई बार पाला भी गिरता है। इससे फसल खराब हो सकती है। पाला गिरने से रबी की फसलों में लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक नुकसान होने की संभावना है। अच्छे उत्पादन के लिए पाले का उपचार जरूरी है। पाला रबी की, गेहूं, मटर,जो आदि फसलों को कम प्रभावित करता है। वहीं सरसों,चना व अन्य सब्जियां जैसे आलू, टमाटर, मिर्च, बैंगन व धनिया आदि को अधिक प्रभावित करता है। इसी प्रकार पपीता,लसोड़ा, आंवला नए लगाए पौधे अधिक प्रभावित करता है।
फूलों व पत्तियों पर असर-
पाले का प्रभाव जड़ों व पत्तियों से ज्यादा फूलों पर होता है। पाले के प्रभाव से पत्तियां व फूल मुरझा जाते है। पौधे झुलसकर बदरंग हो जाते है। अगर फलियों में दाने बन जाते हैं तो दाने सिकुड़कर चपटे व काले पड़ जाते हैं। हरे दाने फलियां में ही गल जाते हैं।
ऐसे लगा सकते है पाले का अनुमान-
तापमान बहुत कम होने व जमाव बिन्दु पर पहुंचने पर पाला पड़ता है। सर्दी में बूंदाबांदी या ओले पढऩे से दिन में अधिक सर्दी के साथ शाम को लगातार ठंडी हवा चलकर एकाएक रुक जाए या हवा के रुक कर धीरे-धीरे चलने से रात के तापमान में गिरावट आती है। आकाश साफ हो जाए तथा वायु में आद्रता अधिक नहीं हो तो पाला गिरता है।
टॉपिक एक्सपर्ट-
पाला पढऩे की संभावना होने पर करीब आधी रात के बाद खेत अथवा फल वृक्षों के बाग के चारों किनारों पर व बीच में घासफूस जलाकर धुंआ करें। जिस तरफ की हवा चल रही हो उसी दिशा से धुआं करें।इस विधि से 4 डिग्री सेल्सियस तापमान आसानी से बढ़ाया जा सकता है। पाले की संभावना होने पर खेत में हल्की सिंचाई करें। तनु गंधक का तेजाब सल्फ्ूयरिक अम्ल के एक से तीन स्प्रे 10 से 15 दिन के अंतराल पर फसल पर 50 प्रतिशत फूल आने पर करें। यूरिया का छिड़काव भी किया जा सकता है। इसके अलावा अन्य रसायनों का उपयोग भी किया जा सकता है। सब्जी वाली फसलों में भूमि के ताप को कम न होने देने के लिए फसलों को टाट, पॉलीथिन अथवा भूसें से ढक दें। साथ ही वायुरोधी टाटियां, हवा आने वाली दिशा की तरफ यानि उत्तरी पश्चिमी दिशा की तरफ बांधें। नर्सरी, किचन गार्डन में उत्तरी पश्चिम की तरफ टाटियां बांधकर क्यारियों के किनारों पर लगाए तथा दिन में पुन: हटा दें। सर्दी में फसल की सिंचाई करने से 0.5 डिग्री से 2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ जाता है।
केसी मीणा संयुक्त निदेशक, कृषि विस्तार,झालावाड़।
source https://www.patrika.com/jhalawar-news/weather-pattern-cold-wave-after-cloudy-fog-possibility-of-mercury-fa-8658718/
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