टीमरू से वन विभाग को हुई 4 करोड की आय, गरीबों को मिलेगा रोजगार

जिले में वन विभाग की 45 इकाइयों के लिए तेंदू पत्ता तोडऩे का ठेका गत दिनों हो चुका है। गर्मी के दिनों में गरीब लोगों के लिए आजीविका का साधन तेंदूपत्ता लोगों को आर्थिक संबल देता है। इसके साथ ही वन विभाग को भी इससे अच्छे खासे राजस्व की प्राप्त होती है। जिले में इस बार 45 इकाईयों का ठेका 4 करोड़ 32 लाख का हुआ है। वहीं गत वर्ष 2 करोड़ 96 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ था। गौरतलब है कि जंगल के आसपास रहने वाले परिवार तेंदूपत्ता तोड़कर गर्मी के खाली समय में रोजगार पाते हैं। इससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आमदनी भी होती है। जिले के जंगल के पास निवासरत दर्जनों गांवों के लोग प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन 300 से 400 रुपए की नकद कमाई करते हैं।


इतने का हुआ टेंडर-
झालावाड़ जिले में इस बार वन विभाग की ओर से जंगल में तेंदूपत्ता तोडऩे का टेंडर गत दिनों किया गया है। इसबार 2024 के लिए 4 करोड़ 32 लाख का टेंडर हुआ है, इस बार गत वर्ष से 1 करोड़ 36 लाख रुपए अधिक प्राप्त हुए है। गत वर्ष 2 करोड़ 96 लाख के टेंडर हुए थे। जिले में बहुतायत संख्या में तेंदू के पेड़ झालावाड़ जिले में जैव विविधता के कारण जंगल काफी समृद्ध है। ऐसे में यहां टीमरू के पेड़ भी काफी पाए जाते है। इनके पत्तों से बीड़ी बनाई जाती है। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार यहां जिले में प्रदेश का करीब 10-15 प्रतिशत ठेके से आय झालावाड़ जिले से होती है। जिले में सभी तरफ जंगल है। जिले में 8 रेंजवाइज 45 इकाइयों का टेंडर हुआ है।


इन रेंज में होता है तेंदूपत्ता का उत्पादन-
असनावर मंडावर, कुआभाव, असनावर, लावासल, नालाबरेडी, डूंगरगांव

बकानी- रीछवा, टेकली, पाटलीखेड़ा, बिन्दाखेड़ा, बैरागढ़

मनोहरथाना- चन्दीपुर, रामपुरिया, पट्टी, बडगांव, महाराजपुरा, लक्ष्मीपुरा, कोलूखेडीकला

खानपुर-पिपलाज, ईरली, महुआखेड़ा, तारज, मालनवासा, धानोदा, पिपल्दा, बन्या, बाघेर, हरिगढ़
झालावाड़- देवरीघटा, खोखन्दा, धनवास, झालावाड़, रायपुर, कममंडी कलां, बगदर
अकलेरा- थनावद, हनौती, मिश्रोली, आमेठा, गुलखेड़ी, घाटोली, आसलपुर, गरडा, दुर्जनपुरा, कुकलवाड़ा
पिड़ावा - पिड़ावा
डग- डग
कुल 45 इकाइयां

वर्ष प्राप्त आय
2019 1.57 करोड़
2020 1.18 करोड़
2021 6.05 करोड़
2022 7.39 करोड़
2023 2.96 करोड़
2024 4.32 करोड़

मई में होगी तेंदूपत्ता की तुड़ाई -
वन अधिकारी संजय कुमार शर्मा ने बताया कि हर वर्ष तेंदूपत्ता की तुड़ाई मई में होती है। इस समय पेड़ों पर आए पत्ते भी बड़े हो जाते है। ऐसे में मई में जंगलों से पत्तों की तुड़ाई की जाती है। जिसमें वन क्षेत्र में निवासरत लोग ही तेंदूपत्ता तोड़कर निर्धारित मूल्य पर ठेकेदार को देते है। जिले की सभी 45 इकाइयों से संबंधित ठेकेदार तुड़ाई मई से शुरू करेंगे।

राजस्थान में यहां होता है तेंदूपत्ता का उत्पादन-

कोटा संभाग में झालावाड़, बारां, बूंदी में सर्वाधिक होता है। वहीं उदयपुर,प्रतापगढ़, चितौडग, बांसवाड़ाए डूंगरपुर में होता है, इसके अलावा तेंदूपत्ता राजस्थान में सिरोही, भीलवाड़ा, अलवर में भी होता है।

45 इकाईयों का हुआ टेंडर-
तेंदूपत्ता तुड़ाई के लिए हाल ही में 45 इकाईयों के टेंडर हुए है। हर वर्ष की भांती 8 रेंजवाइज टेंडर हो चुके हैं।
सागर पंवार, उपवन संरक्षक, झालावाड़।



source https://www.patrika.com/jhalawar-news/forest-department-earns-rs-4-crore-from-teamru-poor-will-get-employme-8780759/

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